Moral stories in Hindi for class 9 (motivational)| Hindi Stories class 9

In this post you will get to read short Hindi moral stories for class 9 students with moral values.

moral stories for class 9

You will read awesome Moral stories in Hindi for class 9 in this post.

Moral stories in Hindi for class 9

 नैतिक शीख के लिए सबसे बढ़िया कहानियाँ

1. कार्य के प्रति लगन | Hindi stories for class 9

farmer

Hindi moral stories for class 9-महाराष्ट्र के गांव में आकाशवाणी होती है आगामी कुछ महीनों में बरसात नहीं होगी। गांव के किसान परेशान हो गए सभी लोग खेती-बाड़ी छोड़कर शहर की ओर रोजगार की तलाश में पलायन कर गए।कुछ ही समय में पूरा गांव खाली होने लगा।

रामदास खेत में हल चलाने लगता है। सारे गांव के लोग हंसते हैं। रामदास को पागल मुर्ख और अनेक शब्दों से उसका उपहास , मजाक बनाते हैं। एक वृद्ध व्यक्ति ने रामदास से पूछा भविष्यवाणी हुई है बारह महीने तक बरसात नहीं होगी तो तुम हल क्यों चला रहे हो ?

हल चलाने से क्या फायदा ? 

जब पानी ही नहीं मिलेगा तो फसल कैसे उपजेगा। प्रश्न के उत्तर में रामदास ने बड़े ही शांत स्वभाव से जवाब दिया , कि मैं इसलिए हल चला रहा हूं कहीं बारह महीने में मैं !

खेती करना ना भूल जाऊं।

यह जवाब सुनकर वृद्ध व्यक्ति वहां से चला गया। रामदास खेत में मेहनत करने में व्यस्त हो गया। रामदास की बात बादलों ने सुनी और कुछ देर बाद काली घटा घिर कर आई और बरसात शुरू हो गई।

सभी लोगों को आश्चर्य हुआ की भविष्यवाणी हुई थी बारह महीने बरसात नहीं होगी।

फिर यह अचानक बरसात कैसे ?

किसी ने बादल को रोककर पूछा भविष्यवाणी हुई थी के बारह महीने बरसात नहीं होगी फिर यह बरसात कैसे ? इस पर बादल ने जवाब दिया कि मैं रामदास के शब्दों से प्रभावित हो गया और मुझे ऐसा लगा कि रामदास अपने कार्य को नहीं छोड़ रहा है वह बारह महीने का इंतजार इसलिए नहीं कर रहा है , कहीं वह खेती करना ना भूल जाए।

इसलिए मैं भी बरस रहा हूं कहीं बारह महीने में मैं बरसना ना भूल जाऊं।

नैतिक शिक्षा

  • कार्य के प्रति लगन हो तो सभी कार्य पुरे होते हे।
  • भगवान भी उसीके साथ है जो अपने कार्य को पूरी निष्ठा से करे।
  • आकस्मिक बरसात रामदास की निष्ठा का फल था।

Moral of this short Hindi story for class 9 in English

  • We should always have the fullest devotion to our work.
  • One day your destiny will bring you success.
  • Nature will help you too if you are courageous enough to fight with problems.
  • God only those people who are willing to help themselves.
  • Never try to run away from problems.

2. एक पुराना स्कूल | Best Hindi story for class 9 with moral values

Hindi moral stories for class 9-एक शहर में एक बहुत पुराना स्कूल था जिसमें आस पास के सभी मध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ने के लिये आते थे।

उस स्कूल में एक नये प्रोफेसर पढ़ाने के लिये आये हुए थे, प्रोफेसर को आये हुए कुछ हफ्ते हो गये थे। क्लास के सभी बच्चे प्रोफेसर को बहुत पसंद करते थे दूसरे प्रोफेसरों के तुलना मे क्योँकि वो अच्छा पढ़ाने के साथ-साथ में बच्चों का मनोरंजन भी करते थे रोज नयी-नयी कहानियाँ अथवा खेल के साथ।

एक दिन प्रोफेसर क्लास में आये और सभी बच्चों से कहा कि मैं कल आप लोगों का एक टेस्ट लूंगा, तो सब अच्छे से तैयारी करके आना।

सबने कहा ठीक है।

दूसरे दिन सभी बच्चे पूरी तैयारी के साथ स्कूल पहुँचे और क्लास में जाके बैठकर प्रोफेसर के आने का इंतेजार करने लगे।

स्कूल की घंटी जैसे बजी, प्रोफेसर क्लास में आये और सभी बच्चों को answer sheet (जिसमें उत्तर लिखा जाता है) दे दिया और कहा कि अभी जो मैं Question Paper दूंगा उनके answers आपको इसी एक कागज में लिखकर पूरा करना है।

सबने हाँ कहकर जवाब दिया।

थोड़ी देर बाद प्रोफेसर ने question paper भी दे दिया जिसमें केवल एक छोटा सा black dot (.) था, पेपर देने के बाद प्रोफेसर ने कहा कि अब आप सब लिखना शुरू कर सकते हो।

सारे बच्चे थोड़ी देर के लिये तो सोच में पड़ गये उस black dot को देखकर लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ न कुछ उस black dot के बारे में लिखा, किसी ने उस black dot के कि जगह के बारे में लिखा तो किसी ने black color के बारे में लिखा।

और लिखने के बाद सबने अपने-अपने answer sheet प्रोफेसर को दे दिये।

प्रोफेसर ने उन सब के जवाब को उन सभी बच्चों के सामने जोर-जोर से पढके सुनायी, और वो सब इंतेजार कर रहे थे ये सुनने के लिये कि किसका जवाब सही था, लेकिन प्रोफेसर ने सही-गलत के बारे बात तक नहीं की।

सबका जवाब पढ़ने के बाद प्रोफेसर ने कहा कि ये exam आपको सही गलत साबित करने, य नंबर देने के लिये नहीं था बल्कि एक बहुत जरूरी सीख देने के लिये था।

और वो सीख ये है कि आप सबने अपने अपने answer sheet में कुछ न कुछ उस छोटे से black dot के बारे में लिखा लेकिन उतने बड़े सफेद जगह के बारे में किसी ने कुछ भी नहीं लिखा।

इसी तरह लोगों में चाहे हजारों अच्छायियाँ क्यों न हो लेकिन हम उनकी बुराइयों को पहले देखते हैं और यही बात हम पर भी apply होती है कि हमारे अंदर strength तो बहुत सारी हैं लेकिन हम केवल अपनी weaknesses के बारे में ही सोच कर रोते रहते हैं।

सीख:

Moral stories in Hindi for Class 9– हम सब के अंदर बुराईयाँ और अच्छाइयां दोनो होती है, किसी के अंदर कुछ अच्छाई है तो उसी के अंदर कुछ बुराई भी है तो किसी को बहुत जल्दी से judge मत कर लिया करो।

और लोगों की और अपनी बुराइयों पर ज्यादा ध्यान न देकर अच्छाइयों पर ध्यान दें।

3. धैर्य की आवश्यकता | Best Hindi story for class 9 with moral values

wolf moral story for class 9

Hindi moral stories for class 9-वर्तमान समय में लोगों में धैर्य की कमी होती जा रही है , जिसके कारण उनका काम और मेहनत से अर्जित पूंजी आदि का निरंतर ह्रास होता जा रहा है।

एक समय की बात है जंगल में एक सियार भूख से परेशान घूम रहा था।

एक वृक्ष के नीचे पहुंचा ही था कि उसे मीठे – मीठे पके हुए फल की खुशबू आने लगी। सियार ने भूख को खत्म करने का उपाय सोचा। अनेकों प्रयत्न करके भी उस फल को तोड़ने का प्रयत्न करता रहा किंतु उसके सारे प्रयास विफल रहे।

सियार ने योजना बनाई और सभी सियार को बुलाकर लाया।

बस क्या था देखते ही देखते सियार का पूरा झुंड पेड़ के नीचे उपस्थित हो गया। सभी सियारों ने अपनी – अपनी बुद्धि का प्रयोग किया किसी ने उछलकर उस फल तक पहुंचने की कोशिश की , किसी ने पेड़ पर चढ़ने का प्रयत्न किया। ऐसे – ऐसे करके सभी सियार अपनी बुद्धि लगाकर थक चुके थे। तभी पीछे बैठे वृद्ध सियार ने एक युक्ति सुझाया। वह युक्ति इस प्रकार थी , जो सबसे बलिष्ठ , बलशाली सियार हो वह नीचे खड़ा हो जाए और उसके ऊपर उससे कमजोर और उसके ऊपर उससे कमजोर।

इस प्रकार खड़े होकर हम सब उस फल तक पहुंच सकते हैं।

वृद्ध सियार का यह सुझाव सभी को पसंद आया , बस क्या था इस योजना को कार्यान्वित किया गया।

योजना के अनुसार एक बलवान सियार नीचे पृष्ठभूमि पर खड़ा हो गया।

उसके ऊपर दूसरा सियार , उसके ऊपर तीसरा , सियार ऐसे करते-करते लगभग आठ – दस सियार खड़े हो गए।

किंतु इस क्रम में समय अधिक लग रहा था।

सबसे नीचे खड़ा सियार मन ही मन शंका करने लगा कि मैं , कहीं नीचे खड़ा सबका बजन उठा रहा हूं और जो सबसे ऊपर सियार हे वह कहीं फल ना खा जाए। इस शंका में पड़े – पड़े वह कुछ समय बाद सिर घुमा कर ऊपर देखना चाहता है कि , आखिर हो क्या रहा है , इसके कारण उस सियार का संतुलन बिगड़ जाता है , और सभी एक दूसरे पर गिर पड़ते हैं।

सभी सियार को चोट आती है।

किसी सियार का पूछ मुड़ गया , किसी के पैर में चोट आई , किसी के मुंह पर चोट आई , किसी के पसलियां टूट गई , किसी की हड्डियां मुड़ गई , अनेकों प्रकार के चोटों का सामना सभी सियारों ने किया।

नैतिक शिक्षा –

  • धैर्य व शांत मन के अभाव में हमारा कार्य बनते – बनते अथवा सफल होते – होते रह जाता है।
  • इसलिए आवश्यकता है कि अपने कार्य को धैर्यपूर्वक करना चाहिए।
  • कार्य की सफलता तक संयम बनाए रखना चाहिए।

Moral of this hindi story for class 9 :

  • Being grateful
  • Doing the great thing
  • Love nature

3. बुद्धिमान बकरी | Hindi stories for class 9 with naitik shiksha

goat story for class 9

एक घने वन में करीना नामक एक वृद्ध बुद्धिमान बकरी रहा करती थी।

वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों को बहुत कष्ट से व्यतीत कर पा रही थी। बकरी इतनी वृद्ध थी कि आसपास के हरे-भरे घास को भी खा पाने में असमर्थ थी।

अपने जीवन से परेशान वह इधर-उधर भटक रही थी , तभी उसको अचानक एक रास्ते पर मयंक नामक शेर ( जंगल का राजा ) के पदचिन्ह नजर आए। अब करीना ( बुद्धिमान बकरी ) ने सोचा क्यों ना महाराज के चरणों में पड़ी रहूं और भूले भटके यदि शेर महाराज आ जाएं तो उन्हीं से गुजारिश करूंगी कि मुझे वह खा जाए !

कम से कम महाराज के तो कुछ काम आ जाऊंगा ।

यह सोचकर

वह शेर के पदचिन्ह पर बैठ गई। कुछ देर में शुभम नामक एक चीता आया वह बड़ा ही खूंखार और मोटा तगड़ा था।

भयंकर आवाज में गरजकर बोला ए करीना ( बुद्धिमान बकरी ) !

तू यहां क्यों बैठी है ?

तुझे डर नहीं लगता मुझसे ?

करीना ने बड़े निर्भीक भाव से बोला ! देखते नहीं यह मयंक महाराज का पदचिन्ह है , उन्होंने ही बिठाकर यहां रखा है , और कहा है जब तक मैं वापस ना लौट आऊं तब तक तुम यहीं बैठे रहना। जंगल का कोई भी जानवर कुछ बोले तो यह पदचिन्ह उसे दिखा देना।

यह महाराज का पदचिन्ह है।

अब चीता वहां से दबे पांव नौ दो ग्यारह हो जाता है।

बुद्धिमान बकरी वहीं बैठी रहती है , काफी समय गुजर जाने के बाद घूमता – फिरता एक सियार भोजन की तलाश में वहां आ जाता है , ललचाई हुई दृष्टियों से उस बकरी की ओर देखता है और आक्रमण करने से पहले वह उससे पूछता है कि तुम यहां क्यों बैठी हो ?

तुम्हें डर नहीं लगता ?

फिर उसने ( बुद्धिमान बकरी ) निर्भीक आवाज में वही जवाब दिया जो चीते ( शुभम चीता ) को दिया था।

अब सियार सिंह महाराज का नाम सुनते ही रफूचक्कर हो गया।

इस प्रकार

जंगल के अनेक प्रकार के हिंसक जानवर आए और बकरी से वार्तालाप करके अंतर्ध्यान हो गए।

बड़े सौभाग्य की बात यह होती है कि शेर (सिंह महाराज) उसी रास्ते वापस आता है और बकरी को गरजकर पूछता है कि , बकरी तो यहां क्यों बैठी हुई है ?

बकरी ने बड़े ही शालीनता से सहज भाव से महाराज को प्रणाम किया और कहा !

महाराज मैं अभी तक तो आपके ही आश्रय में बैठी हुई थी। मेरे वृद्धावस्था के कारण घूमना – फिरना भोजन आदि जीवन में अनेकों परेशानियां हो गई है।

मैं इस जीवन से मुक्ति पाना चाहती हूं।

आप मुझे मार कर खा जाइए या फिर आप मेरे प्राणों की रक्षा करें।

मैं अभी तक आपके नाम से अपने प्राणों की रक्षा करती रही। इस चिन्ह को आपका प्रतीक बनाकर यहां बैठी थी और अपने प्राणों की रक्षा कर रही थी।

बलवान व्यक्ति सदा दयालु प्रवृत्ति का होता है शेर को दया आई।

जंगल में तुरंत एक सभा का आयोजन किया गया ,

उसमें सभी जीव – जंतु , जानवर , विभिन्न प्रजातियों के सभी वहां सम्मिलित हुए।

महाराज का आदेश हुआ के जो हिस्ट- पुष्ट , बलवान और लंबे – चौड़े जितने भी हाथी हैं।

वह निश्चित कर ले एक – एक दिन और इस बकरी को अपनी पीठ पर बिठाकर पूरे जंगल में घूम आएंगे और जहां भी कोमल – कोमल पत्ते हरे – हरे नजर आएं इस बकरी को जो पत्ता खाने का मन करे उस वृक्ष के नीचे खड़े हो जाए।

यह बकरी उस पत्ते को खा लेगी।

पत्ते तक यदि पहुंच ना बने तो डाली झुकाकर अथवा इसके सहूलियत अनुसार भोजन की व्यवस्था कर दी जाए।

अब महाराज का आदेश कौन न माने ?

इस प्रकार बकरी के भोजन का प्रबंध हो गया अब कुछ ही महीने हुए के बकरी हृष्ट – पुष्ट और नवयुवती के समान हो गई। कहां प्रौढ़ावस्था और कहा यह युवावस्था कुल मिलाकर बकरी का भाग्य बदल गया। वह जीवन के कुछ कठिनाई भरे क्षणों में परेशान हो गई थी , किंतु उसके विवेक बुद्धि ने उसका जीवन बदल दिया।

वह अब आनंदमय जीवन को जीने लगी।

नैतिक शिक्षा –

  • व्यक्ति के पास स्वच्छ मन और निष्ठा व चातुर्य बुद्धि हो तो जीवन में असफल कार्य को भी सफल कर सकता है।
  • इसलिए कठिन समय में परेशान होने की जगह बुद्धि का प्रयोग कर उस कठिनाई को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए ।

Moral of this short hindi story for class 9 – 

  • Try to deal with any problem with a relaxed mind.
  • Use your brain wisely before taking any decision.
  • You have to first think before you make any decision.
  • Don’t panic in a problematic situation.

4. राजा और उसके चार घोड़े | Moral stories in Hindi for Class 6, 8, 9

horses

एक राजा था। जिसके चार घोड़े थे। जो बिल्कुल बिना प्रशिक्षण के थे। इन घोड़ों को कोई भी प्रशिक्षण नहीं कर पाया था।

राजा ने कहा जो भी इन घोड़ों को प्रशिक्षित कर सकेगा। उसको बड़ा इनाम मिलेगा।

 पर जैसे ही कोई घोड़ों को हाथ लगाता था वो उनको खींचकर फेंक देता। इसमें कई सारे लोगों की हडीयाँ भी टूट गई थीं।

एक दिन एक जवान आदमी आया‌ और कहा कि मैं इन घोड़ों को प्रशिक्षित कर सकता हूं।

 पर राजा ने कहा कि बहुत लोगों ने ऐसा करने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी हड्डियाँ भी तुड़वा दी है। लेकिन कोई भी अभी तक इन घोड़ों को प्रशिक्षित करने में सफल नहीं हो पाया है।

 उस आदमी ने फिर भी कहाकि मैं इन घोड़ों को फिर भी प्रशिक्षित कर सकता हूं।

पर उसने कहा कि मेरी एक शर्त है। जब तक घोड़े प्रशिक्षित नहीं हो जाते तब तक घोड़े मेरे पास रहेगे।

राजा ने उनकी बात मान ली।

एक साल बीत गया

हफ्ते निकल गए, महीने निकल गए, और देखते ही देखते एक साल बीत गया। लेकिन वह आदमी वापस नहीं आया।

राजा ने कहा कि इन घोड़ों को अब भूल जाओ। क्योंकि वो कभी वापस नहीं आएँगे। घोड़े अब तक उसको छोड़ कर चले गए होगें।

लेकिन कुछ देर बाद घोड़ों की आवाज़ सुनाई दी। उसके चार घोड़े शांति से एक ही लाइन में उस आदमी के साथ चल रहे थे।

राजा अपने घोड़ों को प्रशिक्षित देखकर बहुत खुश हुए। उसने उस आदमी से पूछा कि तुमने इनको कैसे प्रशिक्षित किया?

उसने कहा कि घोड़े सच में जंगली थे। जब घोड़ों को में ले गया तब मैंने उन्हें पूरी तरह छोड़ दिया। जिससे वह जो करना चाहे वह कर सके।

वह जो भी करते मैं वह करने लगा। जब वह भागते तो मैं भी उनके साथ भागता। जब वह सोते थे तब मैं भी उनके साथ सोता था। जब वह खाना खाते थे तब मैं भी उनके साथ खाना खाता था‌।

तब घोड़े सोचने लगे कि मैं भी उनके साथ एक पांचवां घोड़ा हूं। मैंने उसके बाद घोड़ों की पीठ पर ‌सीट रखी।

घोड़ों को वह पसंद नहीं आया। इसलिए उन्होंने सीट को खींचकर निकाल दी।

लेकिन लगातार कोशिश करने के बाद धीरे-धीरे उनको सीट की आदत पड़ गई। बाद में मैंने उसको बेल्ट पहनाया। उन्होंने खींच के उसे भी निकाल दिया।

लेकिन कुछ दिनों के बाद उनको बेल्ट की भी आदत हो गई।

इस तरह मै उनका दोस्त बन गया।

दूसरी लोगों की गलती यह थी कि वह बिना घोड़े से दोस्ती करे घोड़ों को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे।

नैतिक सीख: 

इसी कहानी की तरह हमारे अंदर भी चार घोड़े हैं: एक मानस, दो बुद्धि, तीन चिंता, और चौथा अहंकार।

जब हमें इनमें से किसी घोड़े को काबू में करना है तो तब हम उसी वक्त उनको काबू करना चाहते हैं। जिसका मतलब है हम एक ही मिनिट में खुद को मास्टर बनाना चाहते हैं।

इसलिए हमें अपने मन से पहले दोस्ती करनी पड़ेगी और उसके बाद ही हम हमारे चारो घोड़ों को वश में कर पाएंगे।

Moral of this hindi short Story: 

Moral stories in Hindi for class 9, hindi story with moral for class 9: Like this story, we also have four horses: one psyche, two intelligence, three worries, and the fourth ego.

When we have to control any of these horses, then we want to control them at the same time. Which means we want to master ourselves in a single minute.

Therefore, we will have to befriend our mind first and only then we will be able to tame our four horses.

5. खुली सोच | moral stories in hindi for class 8,9with pictures

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Hindi moral stories for class 9-एक शहर में बहुत अमीर इंसान रहता था। उसके पास बहुत सारा पैसा था। उसे उस बात का थोड़ा अभिमान भी था।

एक बार किसी कारण से उसकी आंखों में इन्फेक्शन हो गया। इन्फेक्शन की वजह से उसकी आंखों में बुरी तरह जलन होने लगी।

 वह डॉक्टर के पास गया। पर डॉक्टर उसकी बीमारी को समझ नहीं पाया।

उसके पास क्योंकि बहुत सारा पैसा था इसलिए वह दूसरे देश मे जाकर वहां के बहुत बड़े डॉक्टर के पास उसकी आंखों के इलाज के लिए गया।

वहां के बड़े डॉक्टर ने बताया कि आपके आंखों में एक ऐसी एलर्जी है जिससे आप हरे रंग के अलावा कोई भी रंग नहीं देख सकते।

अगर आप इसके अलावा कोई ओर रंग देखोगे तब आपकी आंखों में बुरी तरह जलन होगी और आपकी आँखें खराब होती जाएगी। इसीलिए आपको सिर्फ हरे रंग की चीजें ही देखनी  होंगी।

उसके बाद क्या हुआ कि क्योंकि उसके पास बहुत ज्यादा पैसा था। इसीलिए उन्होंने बहुत सारे पेन्टर्स को बुलाया।

उसने उनसे कहा यह सारी जगह है जहां में जाता हूं। वह सारी जगह हरे रंग की कर दो। जितनी दिवारे आपको दिखाई दे रही है।

जो भी चीज आपको दिख रही है वह सारी चीजें हरी रंग की कर दो। जहां से मै गुजरता हूं वहां हरे रंग के सिवा कोई ओर रंग की चीजे दीखनी नहीं चाहिए।

इस काम में ढेर सारा पैसा बबॉद कर दिया

उस इंसान ने इस काम में ढेर सारा पैसा बबॉद कर दिया।

 पर उसमें होता यह था कि कोई ना कोई चीज रह जाती थी जो हरे रंग की नहीं होती थी। जैसे कि आसमान है तो वह नीला रंग का होता है।

वह जो रोटी खाता था। वह हरे रंग की नहीं हो सकती थी। उसका शरीर हरे रंग का नहीं हो सकता था। इस तरह कई सारी चीजें ऐसी थी। जो कभी हरे रंग की नहीं हो सकती थी।

 हर दिन पेन्टर्स अलग अलग चीजों को हरे रंग की करते थे। तो उसका बहुत सारा पैसा खर्च हो रहा था।

एक दिन वहां से 

एक दिन वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था। जिसकी सोच खुली हुई है खुली हुई थी।

उसने देखा कि चारों तरफ चीजें हरे रंग की की हुई है। उसका कारण पूछा कि यह सारी चीजें हरे रंग की क्यों की गई है?

 तो लोगों ने जवाब दिया कि यहां एक इंसान रहता है‌‌। वह बहुत ज्यादा अमीर है। जिसके पास बहुत ज्यादा पैसा है और जिसकी यहां ज्यादा चलती है।

लेकिन उसकी आंखों में एक ऐसी एलर्जी हो गई है। जिसकी वजह से वह हरे रंग के अलावा कोई ओर रंग देखेगा तो उसकी आंखें ओर ज्यादा खराब हो जाएगी। जिसका हल निकालने के लिए उसने शहर की सारी चीजें हरे रंग की कर दी है।

 तो उस इंसान ने सोचा कोई ओर तरीका भी हो सकता था।

वह अमीर इंसान के पास गया और उसने उससे कहा की आपने यह सारी चीजें हरे रंग की क्यों की है ? जबकि इसका कोई ओर भी हल है।

तो वह अमीर इंसान बोला की इसके अलावा ओर क्या हल हो सकता है?

तो उस बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा उसका हल बहुत ही आसान है ओर सस्ता भी है!

तो अमीर इंसान बोला बताओ ऐसा क्या समाधान है?

तो वह बोला कि न जाने कितने‌ पैसे बिगाड़ रहे हो। आप चाहे तो अभी इसी वक्त इसका समाधान कर सकते हो और वह भी बिना कोई ज्यादा खर्च कीए।

 वह बुद्धिमान इंसान बोला आप हरे रंग का चश्मा पहनो। जो कि कुछ ही रुपए का आ जाएगा। जिससे आपको कोई भी चीज हरे रंग की करने की जरूरत नहीं रहेगी।

उस अमीर इंसान की आँखें यह सुनकर खुली की खुली रह गई।

नैतिक सीख: 

Hindi moral stories for class 9-कई बार हल बहुत ही आसान होता है। पर हम अपनी हड़बड़ाहट में उसे देख नहीं पाते। इसीलिए हमें सिर्फ शांति से बैठ कर समस्या के हलके बारे में सोचना चाहिए।

Moral of this hindi short Story: 

Moral stories in Hindi for class 9: Sometimes the solution is very easy. But we cannot see this in our hurry. That is why we should just sit quietly and think about the solution of the problem.

Story’s video

आप चाहो तो इस पूरी कहानी का वीडियो भी देख सकते हो।

उदेश्य:

इस पांच कहानी संकलन का मेरा एक ही उद्देश्य है की आज जो विधार्थी है वो इन में से कुछ शीख लेके जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके। हमें अगर आगे बढ़ना है तो हमें सीखते रहना चाहिए।

आपको जीवन में कुछ अच्छी शीख मिले इसीलिए मेने इस पाँचो कहानी का संकलन किया है। मुझे उम्मीद है की मेरी यह पांच कहानियाँ आपको जरूर पसंद आयी होगी। यह 5 moral stories आपके जीवन में कुछ अच्छा बदलाव लाये यही मेरी कामना है। 

अब आपकी बारी 

  • आपको यह 5 good stories कैसी लगी और इनमे से आपको कोनसी story ज्यादा पसंद आयी वो मुझे comment में ज़रूर बताइये। 
  • आपको यह stories पसंद आयी हो तो इसे आपके दोस्तों और परिवारजनो के साथ share की जिए।

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