Panchtantra Stories in Hindi 2020 | सीख देने वाली,मजेदार, चटपटी

अगर हम अपना इतिहास उठाकर देखें तो उनमे पंचतंत्र की कहानियो का एक अलग ही अस्थान है | कहा जाता है कि कई वर्षों पहले महिलारोग्य नामक नगर में अमरशक्ति नाम के एक प्रतापी राजा राज्य करते थे जिनके तीन पुत्र थे उग्रशक्ति, अनंतशक्ति और बहुशक्ति | राजा अमरशक्ति खुद जितना ही प्रतापी, ज्ञानी और उदार स्वभाव के थे उनके तीनो पुत्र उतने ही निकम्मे, मुर्ख और गलत विचारधारा रखने वाले थे |

इस बात से राजा अमरशक्ति बहुत ही परेशान और दुखी रहते थे, एक दिन उन्होंने अपने सभा में एक बैठक बुलाई जिसमे उन्होंने दूर-दूर से कई सारे ज्ञानी और विद्वान मंत्रियो को बुलावाया और अपनी समस्या को उनके समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमने आप सबको यहाँ इस दरबार में खासकर मेरे पुत्रों के ऊपर विचार विमर्श करने के लिए बुलवाया है, मुझे पता है कि आप सब मेरे पुत्रों की अज्ञानता और मूर्खता से भली भांति परिचित है जो कि आगे चलकर न केवल मेरे लिए बल्कि पुरे राज्य के लिए बहुत डरावने साबित हो सकते हैं | तो अगर आप लोगों के पास उनको रास्ते पर लाने के लिए कोई समाधान है तो मुझे बताईये |

सभी मंत्रियों ने आपस में बहुत विचार विमर्श किया लेकिन उनमे से किसी के पास भी इस समस्या का समाधान नहीं था, तभी उन्हीं में से एक मंत्री जिनका नाम सुमति था सभा में खड़े होकर बोले कि महाराज राजकुमारों की आयु अभी सीखने योग्य नहीं है, वो अब बड़े हो गए है और अगर हम उन्हें सभी शास्त्रों की शिक्षा अभी से देने की शुरुवात करे तो शिक्षा ख़तम होने तक उनकी आयु इतनी बढ़ जायेगी कि वो सभी सीखे हुए ज्ञान उनके किसी काम नहीं रह जायेंगे |

मेरी सलाह अगर माने तो राजकुमारों को किसी ऐसे व्यक्ति की जरुरत है जो उन्हें संक्षिप्त में सभी शास्त्रों और नैतिकताओं कीअच्छी शिक्षा प्रदान कर सके |

राजा ने कहा कि क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति विशेष को जानते है और अगर हाँ तो हमें उनके बारे में बताइए, तभी महामंत्री सुमति ने पंडित विष्णु शर्मा का जिक्र किया और कहा कि मेरे दिमाग में पंडित जी ही एक ऐसे व्यक्ति विशेष हैं जो कम समय में इस कार्य को अच्छी तरह समाप्त कर सकते है और राजकुमारों को अच्छे ज्ञान और विचारों के साथ सुधार सकते हैं |

राजा ने पंडित विष्णु शर्मा को दरबार में बुलवाया और उनसे आग्रह करते हुए कहा कि पंडित जी हम आपको १०० गांव देने का वचन देते हैं लेकिन आप हमारे पुत्रों को अपने शरण में लेकर उन्हें अच्छे रास्ते पर ले आईये|

पंडित जी ने १०० गांव लेने से तो इंकार कर दिया लेकिन राजकुमारों को सुधारना, एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि महाराज मैं आपके राजकुमारों को मात्र ६ महीनों के सुधारने का वचन देता हूँ और अगर मैं ये न कर सका तो आप मुझे अपने नौकरों से कहकर फांसी पर चढ़वा सकते हैं |

ये सुनकर राजा अमरशक्ति निश्चिन्त हो गए और काम पर लग गए | पंडित विष्णु शर्मा राजकुमारों को लेकर अपने आश्रम आ गए |

आश्रम में पहंचते ही राजकुमारों की शिक्षा शुरू हो गयी | पंडित जी का जो शिक्षा देने का तरीका था वो बहुत ही अलग था, पंडित जी रोजाना राजकुमारों को अलग-अलग कथाएं सुनाते जो उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से अच्छे-बुरे, शास्त्रों एवम नैतिकताओं का सीख देती | अपने कथाओ में पंडित जी पशु पक्षियों का पात्रों के रूप में वर्णन करते जो राजकुमारों को दिलचस्प और मजेदार लगती जिसके कारण वो और ऐसे कथाओं को सुनने की अभिलाशा दिखाते | ऐसे करते-करते ६ महीने पुरे होने के करीब आ गए और विष्णु शर्मा ने समय समाप्ति से पहले ही राजकुमारों को हर तरह के उचित अनुचित और व्यवहारिकता के ज्ञान से परिपूर्ण कर दिया और राजकुमारों को सुधारकर एक अच्छा इंसान बना दिया|

राजकुमारों की शिक्षा ख़तम होने के बाद पंडित जी ने उन सारी कथाओं का एक संकलन बनाकर हमारे लिए छोड़ दिया ताकि हम भी उन्हें पढ़कर उनसे कुछ सीखकर जीवन में अच्छी विचारधारा के साथ आगे बढ़ सके |

तो ऐसे हुआ पंचतंत्र की कथाओँ का जनम, इन कथाओं को मुख्यतह पांच अलग भाग में बांटा गया है,

१. मित्रभेद (मित्रों के बीच मनमुटाव)

२. मित्रलाभ (मित्र होने के लाभ)

३. काकोलकियम (कौवे और उल्लुओं की कथा)

४. लब्ध प्रणाश (मृत्यु या विनाश के बारे में)

५. अपरीक्षित कारक (जल्दी बाजी न करें)

इन सारी कथाओं को एक एक करके आगे हम discuss करते रहेंगे |

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