Short Moral Stories in Hindi | Hindi Stories

आजकल कई लोगो को मानना होगा की Hindi Moral Stories का जमाना चला गया है | पर जिस किसी बुनियाद पे हम बड़े हुए है वह अपने माँ-बाप ने हमे सिखये हुए Moral Values ही है | तो आज भी हमे हमारे बच्चो को Mobile Games और Youtube Videos के आलावा एक अच्छी शिक्षा देनी चाहिए | तो दोस्तों आशा करता हु की आपको यह Short Hindi Stories with Moral पसंद आएंगे |

ऐसे बहोत से बढ़िया hindi kahaniya के लिए हमे follow करे

#1 – ज़िन्दगी में खुश रहने का तरीका | Moral Story for Happy Life

गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। वह दुनिया के सबसे दुर्भाग्यशाली लोगों में से एक थे। पूरा गाँव उससे थक गया था; वह हमेशा उदास रहता था, वह लगातार शिकायत करता था और हमेशा बुरे मूड में रहता था।

जितनी उसकी उम्र बढ़ रही थी , वह उतनाही और परेशां हो रहा था, और उतने ही जहरीले उसके शब्द बनते जा रहे थे । लोग उससे दूर भागने लगे थे, क्योंकि उसके बुरे व्यवहार की वजह से लोगो का अच्छा मूड और दिन दोनों भी ख़राब हो जाता था |

उसके वजह से अब तोह लोग भी नाखुश रहने लगे थे ।

लेकिन एक दिन, जब वह बूढ़ा इंसान अस्सी साल का हो गया, तो एक अविश्वसनीय बात हुई। तुरंत ही लोग उसकी अफवाये  सुनने लगे |

“वह बूढ़ा आदमी आज खुश है, वह किसी भी चीज के बारे में शिकायत नहीं कर रहा , मुस्कुराता रहा है, और यहां तक कि उसका चेहरा भी आज ताजा हो गया है।”

पूरा गाँव इकट्ठा हो गया। और  बूढ़े आदमी से पूछा “आपको क्या हुआ?”

बूढ़े ने बताया “कुछ खास नहीं। अस्सी साल मैं खुशी का पीछा कर रहा था, पर कुछ हाथ न आया । और फिर आज मैंने खुशी के बिना जीने का फैसला किया और बस जीवन का आनंद लिया। इसलिए मैं अब खुश हूं। “

Moral of the Story:

खुशी का पीछा मत करो। जीवन का आनंद लो। ख़ुशी अपनेआप आपके पीछे आएगी |

If you run behind Happiness, you will get sorrows more. Don’t expect much & enjoy life.

#2 – चिंता से दूर रहे | Moral Story for Sorrow Life

एक गांव में एक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था | लोग हमेशा बार बार अपने समस्याओं के बारे में शिकायत करने के लिए उनके पास जाते थे ।

एक दिन बुद्धिमान व्यक्ति ने सब लोगो को एक चुटकुला (Joke) सुनाया और सभी लोग हंसी के मरे लोट-पोट हो गए ।

कुछ मिनटों के बाद, उन्होंने उन्हें वही चुटकुला लोगो को सुनाया और फिर उनमें से कुछ ही लोग मुस्कुराए।

जब बुद्धिमान व्यक्ति ने तीसरी बार वही चुटकुला लोगो को सुनाया तो कोई भी नहीं हंसा।

बुद्धिमान व्यक्ति मुस्कुराया और कहा:

“आप एक ही चुटकुले पे बार-बार हँस नहीं सकते। तो आप हमेशा एक ही समस्या के बारे में क्यों रो रहे हैं? “

Moral of the Story:

चिंता करने से आपकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, यह सिर्फ आपका समय बर्बाद करेगा। अच्छा सोचने से ही आप ज़िन्दगी से आगे बढ़ पाओगे |

If you keep on worrying on same things again & again, you will waste your time only. Move ahead and think positive towards life.

#3 – बेईमानी का फल | Moral Story for Honesty

एक नमक बेचने वाला हर दिन अपने गधे पर नमक की थैली को बाजार तक ले जाता था।

रास्ते में उन्हें एक नदी पार करनी होती थी । एक दिन गधा अचानक पानी की धारा में गिर गया और नमक की थैली भी पानी में गिर गई। नमक पानी में घुल के बह गया और इसलिए थैली ले जाने के लिए बहुत हल्की हो गयी  । गधा खुश हो गया ।

फिर गधे ने अपना काम बचानेके लिए रोज चालाकी से थोड़ा नमक पानी में बहाने लगा ।

नमक बेचने वाले को चाल समझ में आई और उसने गधे सबक सिखाने का फैसला किया। अगले दिन उसने गधे पर एक कपास (कॉटन) की थैली लाद दी।

फिर से गधे ने वही चाल खेली कि यह उम्मीद है कि कॉटन की थैली भी हल्की हो जाएगी।

लेकिन भीगे हुए कॉटन को उठाना गधे को काफी भारी पड़ गया और अपने चालाकी के कारन भी गधे को ही नुकसान उठाना पड़ा। पर अपने गलती से गधे ने सबक सीखा और उस दिन के बाद अच्छेसे काम करना शुरू किया |

 Moral of the Story:

 चालाकी और बेईमानी से काम करने वालो को एक दिन सबक मिलता ही है | इसलिए हमेशा ही ईमानदारी से काम करो |

Being dishonest & cunning at work would make you pay more in future.

#4 – दोस्ती की सच्ची परीक्षा | Moral Story on Friendship

विजय और राजू अच्छे दोस्त थे। एक छुट्टी के दिन वो प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते हुए एक जंगल में चले गए। अचानक उन्होंने देखा कि एक भालू उनके पास आ रहा है। वे भयभीत हो गए।

राजू, जो पेड़ों पर चढ़ने के बारे में सब जानता था, एक पेड़ पर चढ़ गया और तेज़ी से ऊपर चढ़ गया। उसने विजय के बारे में नहीं सोचा। विजय को पता नहीं था कि पेड़ पर कैसे चढ़ना है।

विजय ने एक पल के लिए सोचा। उसने सुना था कि जानवर शवों को पसंद नहीं करते हैं, इसलिए वह जमीन पर गिर गया और उसने दम रोक लिया । भालू ने उसे सूँघा  और सोचा कि वह मर गया है। तो, यह अपने रास्ते पर चला गया।

राजू ने विजय से पूछा;

“भालू तुम्हारे कानों में क्या बोला?”

विजय ने जवाब दिया, “भालू ने मुझे तेरे जैसे दोस्तों से दूर रहने के लिए कहा …” और अपने रास्ते पर चला गया।

Moral of the Story:

सच्चा मित्र वही होता है जो मुसीबत के वक्त में काम आये |

A friend in need, is a friend indeed.

#5 The honest old man|Moral Story for Honesty

एक बार एक बहुत ही पवित्र वृद्ध व्यक्ति रहता था। चूंकि उन्हें बहुत सामान के साथ दूसरे शहर की यात्रा करनी थी, इसलिए उन्होंने एक ट्रेन में यात्रा करने का फैसला किया। जब वह टिकट खरीदने गया, तो वह यह देखकर आश्चर्यचकित था कि विक्रेता एक पुराना जलीय पदार्थ था। विक्रेता ने बूढ़े व्यक्ति को बधाई दी और कहा, “कृपया अपने सामान के लिए भुगतान करने की जहमत न करें। मैं एक ही ट्रेन में रहूंगा, इसलिए मैं आपको कोई भी प्रश्न सुनिश्चित नहीं करूंगा ”

ईमानदार बूढ़े आदमी ने तब विक्रेता से पूछा कि वह कितनी दूर यात्रा करेगा। विक्रेता ने उसे एक स्टेशन का नाम बताया। बूढ़े आदमी, जिसे आगे की यात्रा करनी थी, ने उत्तर दिया, “और उसके बाद कौन मेरे साथ होगा?” विक्रेता ने कहा, “मैं अगले गार्ड को आपको बिना किसी समस्या के यात्रा करने का निर्देश दूंगा”।

बूढ़े व्यक्ति ने जोर देकर कहा, “वह गार्ड मुझे कितनी दूर से देखेगा?” विक्रेता ने फिर जवाब दिया, “वह यात्रा के अंत तक आपका साथ देगा।”

बूढ़े ने अब कहा, “लेकिन मेरी यात्रा वहाँ नहीं रुकेगी।” हैरान विक्रेता ने उससे पूछा, “तुम कितनी दूर यात्रा करोगे?”

बूढ़े व्यक्ति ने जवाब दिया, “मुझे इन सभी सांसारिक स्टेशनों से आगे जाना है। मृत्यु के बाद मैं भगवान के दर्शन करने जाऊंगा। कौन सा गार्ड मेरे साथ वहाँ जाएगा और मुझे वहाँ से जाने में मदद करेगा? ”

टिकट विक्रेता अवाक था!

बूढ़े आदमी ने तब गार्ड को समझाया कि ट्रेन उसकी (विक्रेता की) संपत्ति नहीं थी, और इस प्रकार, विक्रेता के पास कोई अधिकार नहीं था कि वह किसी को भी अतिरिक्त सामान ले जा सके और सही किराया चुकाए बिना यात्रा कर सके। उन्होंने कहा, “मैं होशियारी से रीति-रिवाजों से बच सकता हूं और इस दुनिया के अधिकारियों को मूर्ख बना सकता हूं, लेकिन मैं भगवान को बेवकूफ नहीं बनाऊंगा।” गार्ड को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उससे माफी मांगी।

Moral of the Story:

कई बार, हम भी इस कहानी में गार्ड की तरह दुराचार कर सकते हैं, यह सोचकर कि कोई इसे पकड़ नहीं पाएगा। हालाँकि, जैसा कि बूढ़े व्यक्ति ने समझाया है, हालांकि हमारे कर्म दूसरों को नहीं पता हो सकते हैं, भगवान हमेशा जानते हैं कि हमने क्या अच्छा या बुरा किया है। इस प्रकार, हम कुछ गलत करने के प्रलोभन को दूर कर सकते हैं, यह सोचकर कि ईश्वर हमारे कामों के बारे में क्या सोचेगा, भले ही दूसरे क्या सोचते हों।

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